रिपोर्टर- सुनील सोनकर
मसूरी में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस से जुड़े मजदूर संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चार श्रम संहिताओं के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। ‘काला दिवस’ के रूप में आयोजित इस विरोध कार्यक्रम के दौरान मजदूरों ने सरकार पर श्रमिकों के अधिकारों के हनन का आरोप लगाया और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
मसूरी अध्यक्ष आरपी बड़ोनी के नेतृत्व में मजदूर संगठन के कार्यकर्ता पिक्चर पैलेस चौक पर एकत्रित हुए। यहां से उन्होंने नारेबाजी करते हुए सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शन के बाद उप जिलाधिकारी मसूरी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया।
मजदूर संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार श्रम संहिताएं श्रमिक विरोधी हैं, जिनसे मजदूरों के अधिकारों में कटौती हो रही है। उन्होंने राज्य सरकार से इन कानूनों को उत्तराखंड में लागू न करने की मांग की है। जिसमें होटल, स्कूल, दुकानों और चाय बगानों में कार्यरत श्रमिकों को महंगाई भत्ता देने पर लगी रोक हटाई जाए। भवन निर्माण श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी 1500 रुपये प्रतिदिन तय की जाए। मसूरी में अनियंत्रित रूप से खुल रहे होटल और रिसॉर्ट्स पर रोक लगाई जाए। सभी क्षेत्रों में न्यूनतम वेतन कानून सख्ती से लागू किया जाए। व बढ़ती महंगाई और गैस की कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए। नगर पालिका परिषद द्वारा रिक्शा उन्मूलन योजना के तहत प्रभावित 121 रिक्शा चालकों का पुनर्वास किया जाए।
मजदूर नेता आरपी बडोनी और देवी गोदियाल ने साफ चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो 1 जून से मसूरी में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। इस हड़ताल में होटल, स्कूल, रेस्टोरेंट और अन्य क्षेत्रों के कर्मचारी शामिल होंगे। उन्होने कहा कि लगातार श्रम विरोधी नीतियों के चलते मजदूरों का जीवन संकट में है और अब वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। मसूरी जैसे पर्यटन शहर में इस तरह के आंदोलन से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन और सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है कि वे मजदूरों की समस्याओं का समाधान जल्द निकालें।



