रिपोर्टर सुनील सोनकर
मसूरी छावनी क्षेत्र के चार दुकान में आयोजित दो दिवसीय लंढौर मेला इस बार परंपरा से आगे बढ़कर पहाड़ की स्थानीय अर्थव्यवस्था, लोक-संस्कृति और पर्यटन को जोड़ने वाला सशक्त मंच बनकर उभरा। ग्रीन लाइफ संस्था और छावनी परिषद लंढौर के सहयोग से आयोजित मेले में स्थानीय हस्तशिल्प, ऑर्गेनिक उत्पाद और पारंपरिक व्यंजन पर्यटकों की पहली पसंद बने।
पहाड़ी दाल के पकौड़े, पारंपरिक थाली और लोकल उत्पादों की खुशबू ने माहौल को जीवंत किया, वहीं कारीगरों के हाथों बने उत्पादों ने खरीदारी को बढ़ावा दिया। पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय कारीगरों को पहचान और बाजार मिलता है। छावनी परिषद की सीईओ अंकिता सिंह ने मेले को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला बताया।
ग्रीन लाइफ संस्था के निदेशक विवेक वेणीवाल के अनुसार, 11वीं बार आयोजित मेले का उद्देश्य किसानों, कारीगरों और स्थानीय उद्यमियों को सीधा बाजार देना है, ताकि पहाड़ का पैसा पहाड़ में ही रहे। पर्यटकों ने मेले को ‘रीयल उत्तराखंड’ से जुड़ने का अनुभव बताया। कुल मिलाकर, लंढौर मेला स्थानीय हुनर, संस्कृति और सतत पर्यटन का सशक्त संदेश देता नजर आया।



