देहरादून NIU✍️ केदार क्षेत्र से जुड़े प्रवासियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनसरोकारों से जुड़े लोगों का केदारवासी सम्मेलन रविवार को देहरादून स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित किया गया। सम्मेलन में भारी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इस दौरान विभिन्न वक्ताओं ने केदार घाटी से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की और क्षेत्र के विकास, स्थानीय अधिकारों, पलायन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपने विचार रखे।
सम्मेलन का आयोजन त्रिभुवन चौहान की ओर से किया गया। इसमें केदार क्षेत्र से जुड़े विभिन्न स्थानों पर रहने वाले प्रवासियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों ने भाग लिया तथा क्षेत्र की वर्तमान परिस्थितियों और भविष्य की संभावनाओं को लेकर अपने विचार साझा किए।

मूल क्षेत्र से जुड़ाव बनाए रखने पर जोर…
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि रोजगार, शिक्षा और अन्य कारणों से बड़ी संख्या में लोग पहाड़ से बाहर जरूर गए हैं, लेकिन उनका अपने गांव, क्षेत्र और समाज से भावनात्मक जुड़ाव आज भी कायम है। ऐसे में प्रवासी केदारवासियों को अपने मूल क्षेत्र की समस्याओं और विकास की प्रक्रिया से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
वक्ताओं ने कहा कि पहाड़ के विकास की जिम्मेदारी केवल सरकारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रवासी समाज को भी अपनी क्षमता, अनुभव और संसाधनों के माध्यम से क्षेत्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

हक-हकूकों और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा…
सम्मेलन में केदार क्षेत्र के हक-हकूक और स्थानीय अधिकारों से जुड़े विषय प्रमुखता से उठाए गए। इसके साथ ही क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, सड़क एवं संचार व्यवस्था, रोजगार के अवसर और युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर संभावनाएं विकसित करने को लेकर भी चर्चा हुई।
वक्ताओं ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बढ़ता पलायन चिंता का विषय है। यदि गांवों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों तो स्थानीय युवाओं को अपने घर-गांव में ही बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

पलायन रोकने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत…
सम्मेलन में कहा गया कि केदार क्षेत्र के गांवों को मजबूत बनाने के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। पर्यटन, कृषि, बागवानी, स्थानीय उत्पाद और अन्य पारंपरिक व्यवसायों को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़कर युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
वक्ताओं ने कहा कि प्रवासी केदारवासी भी अपने अनुभव, संसाधन और विशेषज्ञता के माध्यम से अपने मूल क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

क्षेत्र के विकास के लिए साझा रणनीति बनाने पर जोर…
सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को अलग-अलग स्तर पर उठाने के बजाय सामूहिक रूप से एक साझा मंच के माध्यम से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इसके लिए भविष्य में भी नियमित रूप से बैठकें और संवाद आयोजित करने की आवश्यकता बताई गई।
आयोजक त्रिभुवन चौहान ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था के विरोध अथवा समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि केदार क्षेत्र से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाकर जनहित और क्षेत्रहित के मुद्दों पर सार्थक संवाद शुरू करना है।
उन्होंने कहा कि पहाड़ से बाहर रहने वाले केदारवासी अपने क्षेत्र से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं और वे अपने गांवों तथा क्षेत्र के विकास में अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से इस तरह के संवाद को आगे भी जारी रखने की आवश्यकता है।
आगे भी जारी रहेगा संवाद…
सम्मेलन में मौजूद लोगों ने क्षेत्र के मुद्दों को लेकर आपसी समन्वय मजबूत करने और भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की। साथ ही क्षेत्र की समस्याओं को संबंधित मंचों तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास करने की बात कही गई।
सम्मेलन के अंत में आयोजकों ने कार्यक्रम में शामिल हुए सभी लोगों का आभार व्यक्त किया और कहा कि केदार क्षेत्र के हित, जनता के अधिकार और क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर यह संवाद आगे भी जारी रहेगा।




