सुनील सोनकर ✍️NIU
मसूरी। आवासीय भवनों में होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद मसूरी में मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने सर्वे शुरू कर दिया है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार 200 से अधिक प्रतिष्ठान जांच के दायरे में आ सकते हैं। इसके बाद होमस्टे और बीएनबी संचालकों की चिंता बढ़ गई है।
एमडीडीए की टीम स्वीकृत नक्शों और भवनों के वास्तविक उपयोग की जांच कर रही है। जिन आवासीय भवनों में बिना अनुमति होटल, रेस्तरां, होमस्टे या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित पाई जाएंगी, उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
होमस्टे संचालकों में चिंता…
मसूरी होमस्टे एसोसिएशन की बैठक में संचालकों ने कहा कि कई स्थानीय परिवार अपने घरों के कमरों में पर्यटकों को ठहराकर स्वरोजगार कर रहे हैं। कुछ लोगों ने इसके लिए बैंक से ऋण लिया है, तो कई परिवारों ने अपनी जमा-पूंजी लगाई है।
संचालकों का कहना है कि बड़े व्यावसायिक होटलों और घरों से संचालित होमस्टे को एक ही दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई होमस्टे और बीएनबी संचालक उत्तराखंड सरकार की पर्यटन नीति के तहत पंजीकरण कराकर काम कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि नियमों की स्थिति स्पष्ट करते हुए वैध संचालकों को अनावश्यक परेशान न किया जाए।
निगरानी तंत्र पर उठे सवाल…
बैठक में यह भी सवाल उठा कि यदि आवासीय नक्शों पर लंबे समय से व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं, तो निगरानी तंत्र ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। संचालकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सर्वे में केवल प्रतिष्ठानों की जांच नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था की संभावित चूक की भी समीक्षा होनी चाहिए।
स्पष्ट नीति और वन टाइम सेटलमेंट की मांग…
होमस्टे संचालकों ने स्वरोजगार बचाने के लिए स्पष्ट नीति और वन टाइम सेटलमेंट की मांग की। उन्होंने कहा कि नियमों के दायरे में आने वाले स्थानीय परिवारों को नियमों के अनुरूप समाधान दिया जाए, ताकि उनका आजीविका का साधन प्रभावित न हो।
भाजपा मसूरी मंडल अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा कि मसूरी में मास्टर प्लान और भू-उपयोग संबंधी प्रावधानों को लेकर स्पष्टता जरूरी है। उन्होंने नियमानुसार पात्र इकाइयों को कंपाउंडिंग यानी शमन का अवसर देने की मांग की।
अधिवक्ता आर्यन देव उनियाल ने सरकार से जल्द ठोस नीति बनाने और वन टाइम सेटलमेंट जैसे विकल्प पर विचार करने की मांग की। उनके अनुसार ऐसा कदम स्थानीय परिवारों के स्वरोजगार की रक्षा करते हुए नियमों के अनुपालन को भी सुनिश्चित करेगा।


