देहरादून NIU ✍️पदोन्नति पश्चात चहेतों के स्थानांतरण में वन विकास निगम प्रबंधन की मनमानी वन विकास निगम में प्रशासनिक अधिकारी से मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पदोन्नति तो की गई है किंतु इस पदोन्नति की सूची जारी होने के पश्चात आज तक अन्य संवर्ग जैसे लेखा संवर्ग, अधिष्ठान संवर्ग, सहायक लौगिंग अधिकारी, लौगिंग सहायक, स्केलर, वन उपज रक्षक,वैक्तिक सहायक या अन्य अधिष्ठान संवर्ग के पदों पर पदोन्नति नहीं की गई। पदोन्नति में इस प्रकार का सौतेला व्यवहार किया जाना वन विकास निगम प्रबंधन की कार्यशैली को दर्शाता है।
कर्मचारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष टी एस विष्ट ने प्रबंधन के मनमाने रवैए पर तीखी भर्त्सना करते हुए प्रेस विज्ञप्ति में हवाला देते हुए स्पष्ट रूप से कहा है कि वन विकास निगम प्रबंधन वन विकास निगम हित में एवं कर्मचारियों के हित में कोई सकारात्मक सोच से कार्य नहीं कर रहा है ।
गौरतलब है कि मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पद पर जिन कार्मिकों की पदोन्नति की गई वे पन्द्रह – बीस वर्षों से एक ही क्षेत्र में कार्यरत हैं जबकि स्थानांतरण नीति पदानुसार कर्मचारियों का स्थानांतरण पदानुसार प्रभागीय एवं क्षेत्रीय स्तर पर स्थानांतरण की प्रक्रिया होती है किंतु वन विकास निगम प्रबंधन जान बूझ कर स्थानांतरण नीति को नीतिगत तरीके से लागू करने में असमर्थ जगजाहिर होता दिखाई दे रहा है क्योंकि अपने चहेतों को उनकी मर्जी के स्थल की तैनाती के अनुसार स्थानान्तरण करने में अपनी चतुराई समझ रहा है।
आश्चर्य की बात यह है कि वन विकास निगम मुख्यालय में एक ही भवन के एक कमरे से बगल के दूसरे कमरे में स्थानांतरण हो रहा है।
पूर्व में प्रबंधन द्वारा अल्प वेतन भोगी फिल्ड कार्मिकों जैसे स्केलर संवर्ग एवं लौगिंग सहायक संवर्ग के कार्मिकों का स्थानांतरण दूर दराज एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्रों में किया गया स्पष्ट है कि अल्प वेतन भोगी कार्मिकों के साथ सौतेला व्यवहार अपनाया गया है और वर्तमान में प्रबंधन ने अपने चहेतों को लाभ देने के लिए चहेतों की मनसा के अनुसार स्थानान्तरण किया गया इस प्रकार से मनमाने तरीके के स्थानांतरण नीति का उत्तराखंड वन विकास निगम कर्मचारी संघ घोर विरोध करता है।
कर्मचारी संघ के प्रांतीय मीडिया प्रभारी राजेंद्र राणा ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि वन विकास निगम प्रबंधन को वन विकास निगम के हित की चिंता नहीं है और न ही वन विकास निगम कर्मचारियों के हित की कोई चिंता है वन निगम के पैसों का धड़ल्ले से दुरपयोग किया जा रहा है, वन विकास निगम में हुए भ्रष्टाचार की अभी तक कोई निष्पक्ष जांच नहीं हुई , मेहनतकश कर्मचारी सुविधाओं से वचित हैं और प्रबंधन से जुड़े हुए अधिकारी मौज मस्ती में हैं ।
टी एस विष्ट ( प्रदेश अध्यक्ष )
राजेन्द्र राणा (प्रदेश मीडिया प्रभारी)



