हरिद्वार। पुलिस मुख्यालय द्वारा साइबर अपराध के हॉटस्पॉट और संभावित हॉटस्पॉट के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। श्यामपुर पुलिस ने संदिग्ध वाहन की चेकिंग के दौरान बिहार के नालंदा और नवादा से जुड़े एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 35 एटीएम कार्ड, 14 बैंक पासबुक, 17 सिम कार्ड, 18 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, 10 एटीएम कवर, पैन कार्ड और 37,500 रुपये की नकदी बरामद की है। प्रारंभिक जांच में बरामद बैंक खातों और डिजिटल उपकरणों के विश्लेषण से 2.75 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन के सुराग मिले हैं।
संदिग्ध स्विफ्ट कार से हुआ नेटवर्क का खुलासा
मामले का खुलासा करते हुए एसएसपी नवनीत भूल्लर ने बताया कि 25 अगस्त की देर रात श्यामपुर पुलिस क्षेत्र में शांति व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान सज्जनपुर पीली क्षेत्र में पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि सफेद रंग की स्विफ्ट कार में सवार कुछ लोग साइबर ठगी से जुड़े हुए हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने रसियाबड़ सिंगल लाइन प्वाइंट पर चेकिंग शुरू की। कुछ देर बाद चिड़ियापुर की ओर से सफेद रंग की स्विफ्ट कार संख्या यूके-08 एएफ-0560 आती दिखाई दी। पुलिस ने कार को रोककर उसमें सवार पांचों व्यक्तियों की तलाशी ली। तलाशी के दौरान एक पिट्ठू बैग से बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक, सिम कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप और नकदी बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की तो साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क की परतें खुलने लगीं।
एक बैग में मिला साइबर ठगी का पूरा सामान
पुलिस के अनुसार आरोपियों के पास से बरामद सामान में 35 एटीएम या डेबिट कार्ड, 14 बैंक पासबुक, 17 सिम कार्ड, 18 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, एक लैपटॉप चार्जर, 10 एटीएम कवर, पैन कार्ड और 37,500 रुपये नकद शामिल हैं।इतनी बड़ी संख्या में बैंकिंग सामग्री और डिजिटल उपकरण मिलने से प्रथम दृष्टया आरोपियों के किसी संगठित साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले।
कई बैंकों के खातों से जुड़ा था नेटवर्क
बरामद 14 बैंक पासबुकों की जांच में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन बैंक और नैनीताल बैंक समेत कई बैंकों के खाते सामने आए हैं। इन खातों में ऋषिकेश, हरिद्वार, कनखल, देहरादून और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े खाताधारकों की जानकारी मिली है। वहीं बरामद 35 एटीएम कार्डों में यूनियन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक, उत्तराखंड ग्रामीण बैंक, नैनीताल बैंक, केनरा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, सिटी यूनियन बैंक और एचडीएफसी बैंक समेत कई बैंकों के कार्ड पाए गए हैं।
व्हाट्सएप बातचीत और क्यूआर कोड से मिले अहम सुराग
बरामद मोबाइल फोन की प्रारंभिक जांच में कई लोगों के साथ बैंक खाता नंबर, खाताधारकों के नाम, लेन-देन और क्यूआर कोड से संबंधित बातचीत सामने आई है। मोबाइल फोन की गैलरी में विभिन्न बैंक पासबुक और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेजों की तस्वीरें भी मिली हैं। पुलिस इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि साइबर ठगी की रकम किन खातों में पहुंचती थी और उसे किन-किन खातों के माध्यम से आगे भेजा जाता था।
म्यूल खातों से एटीएम तक पहुंचती थी रकम
पूछताछ में पुलिस के सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर स्थानीय लोगों से बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम प्राप्त करते थे। इसके बाद इन खातों के एटीएम पिन और यूपीआई पहचान का इस्तेमाल अपने नियंत्रण में रखते थे। साइबर ठगी की रकम पहले ऐसे खातों में पहुंचाई जाती थी, जिन्हें पुलिस की भाषा में म्यूल खाते कहा जाता है। इसके बाद रकम को यूपीआई के माध्यम से दूसरे खातों में भेजा जाता और फिर एटीएम या नकदी जमा एवं निकासी मशीन के जरिए नकद निकाला जाता था। इसके बाद निकाली गई रकम को नेटवर्क में शामिल लोगों के बीच कमीशन के आधार पर बांटे जाने की बात सामने आई है।
नालंदा-नवादा से हरिद्वार तक फैला नेटवर्क
गिरफ्तार आरोपियों में अधिकांश बिहार के नालंदा और नवादा जिले के रहने वाले हैं। पूछताछ में बिहार क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों द्वारा बैंक खाते उपलब्ध कराने और साइबर ठगी की रकम से संबंधित जानकारी देने की बात भी सामने आई है। पुलिस अब उन लोगों की भूमिका की जांच कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर बैंक खाते और बैंकिंग सामग्री उपलब्ध कराई थी। साथ ही नेटवर्क के मुख्य संचालकों और ठगी की रकम को आगे पहुंचाने वाले लोगों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।
2.75 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध मनी ट्रेल
पुलिस के प्रारंभिक बैंकिंग और डिजिटल विश्लेषण में 2.75 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन के सुराग मिले हैं। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह आंकड़ा प्रारंभिक जांच पर आधारित है। बैंक खातों की विस्तृत विवरणी, ग्राहक पहचान संबंधी दस्तावेज, लेन-देन का पूरा इतिहास और डिजिटल फोरेंसिक जांच के बाद ही साइबर अपराध से संबंधित वास्तविक धनराशि और पूरी धनराशि की आवाजाही का पता चल सकेगा।
पुलिस ने मामले में पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया
जिनके नाम पते कृष्णा पांडे, उम्र 24 वर्ष, निवासी नालंदा, बिहार, निरंजन कुमार, उम्र 24 वर्ष, निवासी नवादा, बिहार, सन्नी, उम्र 21 वर्ष, निवासी हरिद्वार, चंद्रमणि कुमार, उम्र 24 वर्ष, निवासी नवादा, बिहार, चंदन पांडे, उम्र 20 वर्ष, निवासी हरिद्वार बताए गए हैं।
डिजिटल उपकरणों की होगी विस्तृत जांच
पुलिस के अनुसार बरामद 18 मोबाइल फोन और दो लैपटॉप मामले की जांच में अहम डिजिटल साक्ष्य साबित हो सकते हैं। न्यायालय की अनुमति के बाद इन उपकरणों की विस्तृत डिजिटल जांच कराई जाएगी। पुलिस मोबाइल फोन में मौजूद बातचीत, बैंक खातों की जानकारी, क्यूआर कोड, तस्वीरों और अन्य डिजिटल सामग्री का विश्लेषण कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करेगी।
इन धाराओं में हुई कार्रवाई
पुलिस के अनुसार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 317(2), 3(5) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66सी तथा 66डी के तहत कानूनी कार्रवाई की गई है।जांच के दौरान पुलिस म्यूल खाता उपलब्ध कराने वालों, साइबर ठगी की रकम निकालने वालों और नेटवर्क के मुख्य संचालकों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार ने कहा कि साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी कहीं भी छिपे हों, हरिद्वार पुलिस उनके नेटवर्क तक पहुंचकर उन्हें कानून के शिकंजे में लाएगी। इसके लिए पुलिस की एक बड़ी टीम लगातार काम कर रही है। आरोपितों को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम को पांच हजार के इनाम की घोषणा की है।


