दीप मैठाणी NIU ✍️देहरादून उत्तराखंड की गंगोत्री विधानसभा में एक नया राजनीतिक स्वर उभर रहा है “युवा नेता नवनीत उनियाल” जो ‘जल-जंगल-जमीन और रोजगार’ के स्थानीय मुद्दों को लेकर गाँव-गाँव जनसंपर्क अभियान चला रहें हैं। उनकी टीम का दावा है कि वे न तो कोई तनख्वाह लेंगे न ही कमिशन, मकसद सिर्फ जन सेवा को सर्वोपरि रखकर रिवर्स पलायन की राह बनाना है।

गंगोत्री सीट पर इन दिनों चर्चा में आ रहे नवनीत उनियाल को क्षेत्रीय स्तर पर एक उभरते युवा चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है। स्थानीय रिपोर्ट्स और चुनावी अपडेट्स में उनका नाम गंगोत्री विधानसभा के संभावित सक्रिय युवा नेतृत्व के संदर्भ में आता है, जहाँ वे जनसंपर्क, स्थानीय मुद्दों और महिला सशक्तिकरण व युवा शक्ति के संगठन पर जोर दे रहे हैं।

नवनीत उनियाल खुद एक बड़े उद्यमी हैं मल्टीनेशनल कंपनियों में लाखों रुपए का पैकेज होने के बावजूद उन्होंने रिवर्स पलायन किया और पहाड़ को चुना, न्यूज़ इंडिया अपडेट के पॉडकास्ट में उन्होंने बताया था की सूखी टॉप पर उन्होंने आलीशान रेस्टोरेंट खोलकर स्थानीय युवाओं को रोजगार भी उपलब्ध कराया वहीं एक बड़ा बगीचा लगाकर सेब की खेती से लेकर अन्य खेती भी उनके द्वारा खुद की जा रही है, जिसके चलते उनके द्वारा किया जा रहा कोई भी तनख्वाह ना लेने का दावा और निधियों में हर प्रकार के कमीशन नष्ट करने का दावा युवाओं का उनपर भरोसा बढ़ा रहा है।

टीम नवनीत हर रोज़ एक कार्यक्रम के जरिए स्थानीय मुद्दों को उठा रही है।
जल, जंगल, जमीन और रोजगार—पहाड़ की चिर-परिचित चिंताएँ, जो अब चुनावी एजेंडे का केंद्र बन रही हैं।
- युवाओं को न सिर्फ जोश से भरना, बल्कि उन्हें खुद रोजगार देने और उद्यमी बनाने का वादा।
- “नहीं लूंगा तनख्वाह, नहीं लूंगा कमिशन” यह दावा जनसंपर्क अभियानों में बार-बार दोहराया जा रहा है।
- यह रुख उत्तराखंड में चल रहे ‘रिवर्स पलायन’ बहस के अनुकूल है, जहाँ सरकार और समाज दोनों गाँव लौटने, आजीविका और सुविधाओं के भरोसे पर जोर दे रहे हैं।



गंगोत्री विधानसभा सीट उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में आती है और यहाँ की राजनीति में एक अनोखी मान्यता प्रचलित है की जिसे भी यह सीट मिलती है, प्रदेश में अक्सर उसी की सरकार बनती है। 2027 के विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में यहाँ कांटे की टक्कर की संभावना जताई जा रही है, हालाँकि अभी तक बड़ी पार्टियों ने औपचारिक रूप से अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। ऐसे में स्थानीय/क्षेत्रीय स्वर और युवा नेतृत्व का उभरना सीट की गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है। वहीं अगर सीट महिला आरक्षित हुई तो भी इस सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी।

नवनीत उनियाल का दावा केवल नौकरी नहीं, बल्कि आजीविका, बाजार और सुविधाओं का भरोसा यह वही तर्क है जो उत्तराखंड की मौजूदा बहस में प्रमुख है।
युवाओं को उद्यमी बनाने और खुद रोजगार सृजन का संकल्प, मतदाताओं में आशा जगाता है।
तनख्वाह/कमिशन न लेने की शपथ का दावा पारदर्शिता और भरोसे की राजनीति का संकेत दे रहा है।
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