दीप मैठाणी NIU ✍️ देहरादून उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) एक बार फिर विवादों में आ गई है। पार्टी ने हाल ही में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उस महिला को मंच दिया, जिसने कांग्रेस के एक पार्षद पर झूठे बलात्कार की धमकी के आरोप लगाए थे। बाद में तथ्यों से स्पष्ट हुआ कि मामला राजनीतिक या सामाजिक उत्पीड़न का नहीं, बल्कि लीज पर ली गई जमीन के भुगतान विवाद से जुड़ा था।
महिला ने उक्रांद के प्रतिनिधियों को झूठी भावनात्मक कहानी सुनाकर समर्थन हासिल किया, पार्टी ने भी किसी और विषय पर की जा रही प्रेस वार्ता में उक्त महिला को स्थान दे डाला और यहीं यूकेडी ने सबसे बड़ी गलती कर दी।बिना पूरी जांच किए प्रेस वार्ता में उक्त महिला को स्थान देने के चलते न सिर्फ यूकेडी की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं बल्कि कुछ मीडिया समूहों को भी कठघरे में ला दिया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कई स्थानीय मीडिया संगठनों ने बिना तथ्यों की पुष्टि किए महिला का वीडियो प्रसारित कर दिया। जानकारों का कहना है कि पत्रकारिता का बुनियादी सिद्धांत है कि किसी भी पक्ष पर आरोप लगने पर दूसरे पक्ष को भी सुनवाई का अवसर दिया जाए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ, प्रेस क्लब से जुड़े वरिष्ठ पत्रकारों ने इसे “मीडियाई गैर-जिम्मेदारी” करार देते हुए कहा कि बिना सत्यापन किए किसी की सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाना गंभीर लापरवाही है, वहीं जमीनी घोटाले को लेकर की जा रही प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच में इस तरह का मुद्दा उठाने पर भी सवाल उठाया।।
NIU संपादक से हुई वार्ता पार्षद ने बताया कि उनका इस विवाद में कोई निजी स्वार्थ नहीं है। वे तो सिर्फ पीड़ित परिवार के कहने पर मामले में मध्यस्थता कर रहे थे। “महिला ने न केवल गलत आरोप लगाए, बल्कि लीज पर ली गई जमीन का भुगतान भी लंबे समय से नहीं किया है,” पार्षद ने कहा कि UKD में आत्ममंथन की जरूरत है, राजनीतिक रूप से कमजोर लेकिन भावनात्मक रूप से सक्रिय दलों को ऐसे मामलों में अधिक सतर्क रहना चाहिए। बिना तथ्यों की पड़ताल किए किसी को मंच देना न केवल पार्टी की साख को चोट पहुंचाता है, बल्कि समाज में भ्रम भी फैलाता है, उन्होंने यूकेडी की तरफ से अब इस पर अपना रुख साफ करने की बात कही है, अन्यथा उन्होंने कानूनी दरवाजा खटखटाना की बात भी कहीं है।



