दीप मैठाणी NIU✍️देहरादून, आज के भौतिकवादी दौर में जहां अधिकांश लोग धन-दौलत की दौड़ में लगे हैं, वहीं कुछ ऐसी शख्सियतें भी हैं जो मानवता की सेवा को ही अपना जीवन मानती हैं। देहरादून के शास्त्री नगर में रहने वाले एसके पेटवाल ऐसी ही एक प्रेरणादायक मिसाल हैं। सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन असहाय और निर्धन लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया है। पिछले लगभग 30 वर्षों से वे नारायण सेवा संस्थान संचालित कर रहे हैं, जहां हर रविवार को जरूरतमंदों को निःशुल्क भोजन वितरित किया जाता है।

पेटवाल जी बताते हैं कि उनकी यह यात्रा 1982 में शुरू हुई, जब वे सरकारी नौकरी में थे। उस समय वे सत्य साईं बाबा समिति से जुड़े और बाबा के मानवसेवा के आदर्शों से प्रेरित हो गए। “सेवानिवृत्ति के बाद मैंने फैसला किया कि अब मेरा जीवन सिर्फ मानवता के लिए ही होगा,” उन्होंने कहा। पिछले 20 वर्षों से देहरादून में नारायण सेवा संस्थान के माध्यम से वे असहाय, गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। संस्थान में हर रविवार आयोजित भंडारे में सैकड़ों लोग लाभान्वित होते हैं, जो निस्वार्थ सेवा का जीवंत उदाहरण है।

मानवसेवा के इस पुनीत कार्य को और व्यापक बनाने के लिए पेटवाल जी ने पर्यावरण संरक्षण को भी अपनाया है। नारायण सेवा धाम में उन्होंने कदम्ब, रुद्राक्ष और वैजयंती माला जैसे दुर्लभ औषधीय पेड़-पौधे लगाए हैं। ये पौधे न केवल शुद्ध वातावरण बनाते हैं, बल्कि आयुर्वेदिक महत्व के कारण लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं। “प्रकृति की सेवा ही मानव सेवा का आधार है,” पेटवाल जी का मानना है।
इस नेक कार्य में पेटवाल जी अकेले नहीं हैं। कई सेवानिवृत्त व्यक्ति उनके साथ जुड़े हुए हैं, जो तन-मन-धन से समर्पित होकर मानवता की सेवा कर रहे हैं। इसी कड़ी में बीते रविवार को आयोजित भंडारे में पूर्व मंत्री नारायण सिंह राणा और श्रीमती वंदना स्वामी (पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय नित्यानंद स्वामी की पुत्री) ने विशेष रूप से शिरकत की। दोनों ने पूजा-अर्चना की और भंडारे की सेवा में हाथ बंटाया, जिससे यह आयोजन और भी भव्य बना।
एसके पेटवाल जैसे लोग समाज को सिखाते हैं कि सच्ची संपत्ति धन नहीं, बल्कि सेवा भाव है। उनका यह कार्य न केवल देहरादून, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुका है। ऐसे प्रयासों से समाज में सकारात्मक बदलाव की आशा जागती है।



