पटना। बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। नीतीश कुमार ने विधान परिषद (एमएलसी) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें 14 दिनों के भीतर एक सदन की सदस्यता छोड़ना अनिवार्य था, जिसकी समयसीमा आज समाप्त हो रही थी।
मुख्यमंत्री का इस्तीफा स्वीकार करते हुए विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने बताया कि त्यागपत्र मात्र 29 शब्दों में लिखा गया था। मंत्री विजय कुमार चौधरी और एमएलसी संजय गांधी इस्तीफा लेकर पहुंचे थे।
हालांकि, नीतीश कुमार फिलहाल बिहार के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने को लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सियासी हलकों में अटकलें तेज हैं कि राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद वे यह पद भी छोड़ सकते हैं। उनका राज्यसभा कार्यकाल 10 अप्रैल से शुरू होगा।
इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि बिहार में जल्द नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है। 2005 से सत्ता में सहयोगी रही भाजपा को इस बार मुख्यमंत्री पद मिलने की संभावना जताई जा रही है।

सीएम रेस में आगे सम्राट चौधरी
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है। पार्टी में उनका तेजी से उभार और कुशवाहा समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ उनके पक्ष में मानी जा रही है।
नित्यानंद राय भी दावेदार
केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल है। हालांकि उनका यादव समुदाय से होना, जो पारंपरिक रूप से राष्ट्रीय जनता दल के साथ जुड़ा रहा है, उनके लिए चुनौती बन सकता है।
फिलहाल भाजपा और जदयू की ओर से मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में हलचल और तेज होने की संभावना है।




