दीप मैठाणी ✍️देहरादून, उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। दिल्ली में कल कांग्रेस को मजबूत करने की कवायद के बीच पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल समेत कई बड़े नेताओं के पार्टी में शामिल होने की खबर ने जहां उत्साह पैदा किया, वहीं रुद्रपुर से आई एक बड़ी खबर ने कांग्रेस की आंतरिक खींचतान को साफ तौर पर उजागर कर दिया। पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष और वर्तमान महिला कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष मीना शर्मा ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।

मीना शर्मा, जो सदस्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी और महिला कांग्रेस की हरिद्वार जनपद प्रभारी भी हैं, ने राजकुमार ठुकराल के कांग्रेस में शामिल होते ही यह फैसला लिया। उन्होंने एक औपचारिक पत्र लिखकर अपना इस्तीफा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को सौंप दिया। पत्र में उन्होंने साफ कहा है कि नए नेताओं की एंट्री से पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है, जिससे पार्टी में असंतोष बढ़ रहा है।

उन्होंने कई वरिष्ठ नेताओं के नाम पत्र पर लिखते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने लंबे समय से अपने नेताओं को अवगत कराते हुए यह बताया था कि उक्त राजकुमार ठुकराल द्वारा भाजपा विधायक रहते हुए रुद्रपुर शहर में साम्प्रदायिक दगें कराये गये, मुस्लिमों के प्रति जहर घोला गया उनको अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया और उन्हें प्रताडित किया गया यही नहीं उक्त ठुकराल द्वारा शहर में हिन्दू मुस्लिम के बीच गहरी खाई खोदने का काम भी किया गया, उक्त ठुकराल द्वारा शहर में गोकशी कर शहर का माहोल खराब किया गया। यही ठुकराल द्वारा महिलाओं के प्रति भी अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर उन्हें अपमानित किया जाता रहा। मैं स्वयं इसकी भुक्तभोगी हूँ। उक्त ठुकराल द्वारा मेरा भी चरित्र हनन किया गया जिसको लेकर मैने लड़ाई लड़ी और रुद्रपुर कोतवाली में इनके विरूद्ध मुकदमा भी दर्ज हुआ यह सभी बाते मैं कॉग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को लगातार बताती रही लेकिन पार्टी ने इसें गभीरता से नहीं लिया, शर्मा ने कहा, “पार्टी में बाहरी लोगों को महत्व देकर पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ा जा रहा है। मैं ऐसे हालात में पद पर बने रहने के बजाय अपनी गरिमा बचाने का फैसला ले रही हूं।

वहीं दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। ठुकराल, जो लंबे समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं, अपनी सक्रिय राजनीति और क्षेत्रीय प्रभाव के लिए जाने जाते हैं। उनके साथ कई अन्य प्रभावशाली नेताओं ने भी कांग्रेस जॉइन की, जिसे पार्टी ने अपनी ताकत बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इसे “परिवार में नए सदस्यों का स्वागत” करार दिया और कहा कि इससे आने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी मजबूत स्थिति में होगी।
हालांकि, ठुकराल की एंट्री के ठीक बाद मीना शर्मा का इस्तीफा कांग्रेस के लिए झटका बन गया। रुद्रपुर, जो ऊधमसिंह नगर जिले का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र है, में शर्मा का लंबा राजनीतिक सफर रहा है। वे पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष रह चुकी हैं और महिला कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं। उनका इस्तीफा न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। यह घटनाक्रम कांग्रेस में चल रही आंतरिक खींचतान का स्पष्ट संकेत है। एक तरफ पार्टी नए और प्रभावशाली नेताओं को जोड़कर अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रही है, वहीं पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी साफ दिख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पैटर्न उत्तराखंड कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार गजेंद्र रावत ने कहा, “नए चेहरों को लाने से वोट बैंक बढ़ सकता है, लेकिन पुराने कार्यकर्ताओं का मोह भंग होने से बूथ स्तर पर नुकसान होगा। “पिछले कुछ महीनों में कांग्रेस में इसी तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। कुछ नेताओं ने भाजपा का रुख किया तो कुछ ने इस्तीफा दे दिया। चुनावी माहौल में यह असंतोष पार्टी की एकजुटता को चुनौती दे सकता है। खासकर हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे संवेदनशील जिलों में, जहां महिला वोटरों का प्रभाव महत्वपूर्ण है,

मीना शर्मा के भविष्य पर भी सबकी नजरें टिकी हैं। क्या वे स्वतंत्र रूप से सक्रिय रहेंगी या किसी अन्य पार्टी का दामन थाम लेंगी? फिलहाल, उन्होंने कहा है कि वे राजनीति से संन्यास नहीं लेंगी, बल्कि जनसेवा जारी रखेंगी। उत्तराखंड की सियासत में यह नया अध्याय क्या मोड़ लाएगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।



