दीप मैठाणी ✍️ NIU देहरादून, उत्तराखंड कांग्रेस ने सोमवार 16 फरवरी को राजधानी देहरादून के परेड ग्राउंड में एक भव्य महारैली का आयोजन किया, जिसके बाद हजारों कार्यकर्ताओं ने राजभवन कूच किया। प्रदेश भर से जुटे कांग्रेस नेताओं और समर्थकों ने इसे ‘ऐतिहासिक’ करार देते हुए सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

रैली के दौरान हाथी बड़कला क्षेत्र में पुलिस बेरिकेडिंग पर धक्कामुक्की की स्थिति बन गई, जिसमें कुछ कार्यकर्ताओं को मामूली चोटें भी आईं।

परेड ग्राउंड पर सुबह से ही विशाल भीड़ जमा होने लगी थी। तस्वीरों और वीडियो फुटेज में दिखाई दे रही भारी भीड़ से साफ लगता है कि कांग्रेस ने इस महारैली के लिए व्यापक तैयारी की थी। विभिन्न जिलों से हजारों कार्यकर्ता ट्रक, बसों और निजी वाहनों से देहरादून पहुंचे। रैली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए, जिन्होंने मंच से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और विकास कार्यों में विलंब के आरोप लगाए।

रैली परेड ग्राउंड से शुरू होकर राजभवन की ओर बढ़ी। हाथी बड़कला चौराहे पर पहुंचते ही पुलिस ने भारी बेरिकेडिंग लगा दी, जिससे कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोका गया। इससे नारेबाजी तेज हो गई और धक्कामुक्की की स्थिति बन गई। लेकिन स्थिति बिगड़ने से पहले ही प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया गया। कांग्रेस पक्ष का दावा है कि दर्जनों कार्यकर्ता घायल हुए, जबकि पुलिस ने इसे मामूली घटना बताया।
कांग्रेस नेताओं ने इस कूच को ‘जनाक्रोश महारैली’ करार देते हुए कहा कि यह उत्तराखंड की जनता की पीड़ा का प्रतीक है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “यह ऐतिहासिक कूच है, जो भाजपा सरकार की नाकामियों के खिलाफ जनता का आक्रोश दिखाता है। हम राजभवन घेरेंगे और अपनी मांगें मनवाएंगे।

“भाजपा का पलटवार: ‘कांग्रेस झूठ की राजनीति कर रही’ वहीं, भाजपा ने कांग्रेस के प्रदर्शन को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक स्टंट बताया। देहरादून महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस मुख्यमंत्री धामी की अगुवाई में हो रहे तेज विकास कार्यों से परेशान है। इसलिए भाजपा की छवि खराब करने और जनता को बरगलाने के लिए ऐसी नौटंकियां कर रही है।”अग्रवाल ने कांग्रेस की पुरानी रणनीति पर चुटकी लेते हुए कहा, “कांग्रेस की नीति है- झूठ बोलो, बार-बार झूठ बोलो। इन रैलियों में झूठ फैलाकर जनता को गुमराह कर वे सस्ती राजनीति कर रहे हैं। उत्तराखंड की जनता सब समझती है और 2027 के विधानसभा चुनावों में इसका जवाब देगी।

वहीं राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी रैलियां 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले दोनों दलों के लिए जमीन तैयार करने का माध्यम बन सकती हैं। पुलिस ने प्रदर्शन के बाद शांति बनाए रखने के लिए भारी फोर्स तैनात की है। कांग्रेस ने कानून व्यवस्था में सुधार न होने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।





