उत्तम सिंह ✍️NIU लालतप्पड़ सरकारी संस्थान किस तरह सरकार पर ही बोझ बने हुए हैं और इनके जरिए जनता की गाढ़ी कमाई बिना काम के वेतन और अन्य खर्चों पर किस तरह लुटाई जा रही है | इसकी बानगी माजरी ग्राण्ट स्थित खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान में देखी जा सकती है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्योनिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित यह संस्थान वर्ष 2017 में स्थापित किया गया था। इस संस्थान में विभिन्न कोर्सेज भी संचालित किए जाने थे मगर तब से अब तक यहां प्राध्यापकों तक की नियुक्ति नहीं हो पायी है। विद्यालय प्रशासन का कहना है कि अभी भवन निर्माण का कार्य चल रहा है। इसके बाद ही कोर्स संचालित किए जा सकेंगे। वहीं इस स्थान में कर्मचारियों की ओर से ग्रामीणों को फल एंव खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण भी दिया जाता है मगर सिर्फ कागजों में।

विश्वविद्यालय से सूचना के अधिकार में ली गई जानकारी में पता चला है कि माजरीग्राण्ट व इसके आसपास क्षेत्र में कई प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गये, जिनमें लाखो रुपये का खर्चा हुआ। वहीं विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के वेतन पर भी हर माह लाखो का खर्चा हो रहा है। इसके अलावा वर्ष 2023-24 में कृषि निवेश व अन्य मद में 46 लाख रुपए से अधिक का खर्चा हुआ। कहा जा सकता है कि खर्चा तो लाखों में है मगर संस्थान की उपलब्धि शून्य है।




