देहरादून ✍️ NIU फूलदेई का त्यौहार भारत के उत्तराखण्ड राज्य का एक स्थानीय त्यौहार है, जो कि चैत्र मास की संक्रान्ति को मनाया जाता है। इस त्यौहार को “फूल संक्राति” के नाम से भी जाना जाता है। यह बसंत ऋतु के आगमन का और प्रकृति से जुड़ा हुआ त्यौहार है।
बच्चे इस त्यौहार के आने का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं, और इस दिन काफी उत्साहित भी रहते हैं। इस चैत्र महीने के प्रारम्भ होते ही तरह तरह के फूल खिल जाते हैं। इसमें जंगली फूलों में प्योली/फ्यूंली, बुरांस, बासिंग, हिसर इत्यादि शामिल हैं। जंगली फूलों के अलावा आडू, खुबानी, पुलम के फूलों का भी अपना महत्त्व है।फूलदेई को विशेष रूप से बच्चों के द्वारा बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। बच्चों के अलावा अन्य लोगों के द्वारा भी इस त्यौहार को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस त्यौहार को शहरी इलाकों और विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
फूलदेई पर्व के दिन बच्चे लोक गीत गाते हुए सुबह-सुबह देहरी पर ताजे फूल रखते हैं। “फूलदेई, फूलदेई, छम्मा देई, छम्मा देई, दैंणी द्धार, भर भकार, यो देली सौं, बारंबार नमस्कार”
फूलदेई जैसे पारंपरिक त्यौहार न केवल आज की पीढ़ी को प्रकृति के प्रति अपना आभार प्रकट करने का अवसर देते है पर इससे हमें अपनी विरासत को अगली पीढ़ी के लिए संजोने की प्रेरणा भी मिलती है।
फूलदेई पर्व पर धाद संस्था समग्र रूप से पूरे उत्तराखंड में दस हजार बच्चों को फूलदेई पर होने वाले कार्यक्रमों से जोड़ेगी। इसका शुभारंभ आज दिलाराम बाजार में राजकीय जूनियर हाईस्कूल में लोकगायिका रेशमा शाह की मौजूदगी में होगा। संस्था बच्चों के साथ विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां, प्रतियोगिताएं आयोजित करेगी।




