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मुख्यमंत्री आवास के करीब 1100 एकड़ भूमि पर कौन करवा रहा कब्जा? उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा ने खोला मोर्चा । NIU

मुख्यमंत्री आवास के करीब 1100 एकड़ भूमि पर कौन करवा रहा कब्जा? उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा ने खोला मोर्चा । NIU

दीप मैठाणी ✍️NIU देहरादून, आज की बड़ी ख़बर देहरादून से है, जहाँ मुख्यमंत्री आवास से महज तीन किलोमीटर दूर लगभग 1100 एकड़ जमीन पर कथित अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।
विदित हो की मुख्यमंत्री आवास से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित लगभग 1100 एकड़ भूमि पर कथित निर्माण और बसावट की खबरों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। मामला तब गरमाया जब उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष बॉबी पंवार और उपाध्यक्ष त्रिभुवन चौहान ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर एक विस्तृत शिकायत सौंप दी।

मोर्चा नेताओं का आरोप है कि विवादित भूमि पर लंबे समय से गतिविधियाँ चल रही हैं, जबकि प्रशासनिक तंत्र मौन बना हुआ है। शिकायत में कहा गया है कि भूमि का मामला अंगेलिया कंपनी और राज्य सरकार के बीच न्यायालय में लंबित है और कानूनी प्रक्रिया जारी है, लेकिन बावजूद इसके क्षेत्र में निर्माण और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था उपलब्ध करवाई जा रही है जोकि बड़ा सवाल है।
वहीं जिलाधिकारी ने शिकायत पर संज्ञान लिया है और मामले की जांच के लिए एसडीएम सदर को जिम्मा सौंप दिया है। स्वाभिमान मोर्चा ने कहा है कि यह केवल भूमि विवाद नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक संरक्षण का मामला भी है।

मोर्चा ने स्थानीय प्रशासन से कई सवाल उठाए हैं,


क्षेत्र के एक नेपाली मूल निवासी ने कथित रूप से दावा किया है कि इलाके में लगाई गई स्ट्रीट लाइट मध्यस्थता के ज़रिये मंत्री गणेश जोशी के माध्यम से उपलब्ध कराई गई थीं। बता दें की इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है।
इसपर बॉबी पंवार ने कहा है कि उत्तराखंड की जमीनों पर अवैध कब्जे और संदिग्ध निर्माण राज्य के भविष्य के लिए ख़तरा हैं। त्रिभुवन चौहान ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री आवास के आसपास ही कानून का पालन नहीं हो रहा है तो प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों की स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

हमने जिलाधिकारी कार्यालय और संबंधित विभागों से इस मामले पर टिप्पणी के लिए संपर्क करने की कोशिश की है, अधिकारियों ने मामले की जांच की सूचना दी है, पर विस्तृत आधिकारिक बयान अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है।
स्वाभिमान मोर्चा ने मामले की उच्चस्तरीय जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल और विवादित भूमि पर हो रही गतिविधियों का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की है। अब जनता जानना चाहती है कि आखिर 1100 एकड़ भूमि पर हो रही गतिविधियों के पीछे कौन है, किसके संरक्षण में यह सब हो रहा है और प्रशासन इतने समय तक खामोश क्यों रहा।

यह मामला आगे बढ़ने पर राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से अहम सवाल खड़े कर सकता है। जैसे ही जांच से नए तथ्य सामने आएंगे, हम आपको अपडेट करते रहेंगे।

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