दीप मैठाणी NIU ✍️देहरादून, उत्तराखण्ड ठेकेदार संयुक्त जन मंच समिति ने राज्य सरकार की नीतियों पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि प्रदेश में डी-क्लास ठेकेदारों की स्थिति लगातार बिगड़ रही है और बाहरी प्रदेशों से आ रहे ठेकेदारों के प्रतिद्वंद्वीपन (कंपटिशन) के कारण स्थानीय ठेकेदारों को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। यह आरोप समिति के अध्यक्ष संजय पोखरियाल ने आज उत्तरांचल प्रेस क्लब, देहरादून में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान लगाए।
पोखरियाल ने कहा कि प्रदेश में पीएमजीएसवाई (प्रमुख ग्रामीण मार्ग योजना) से जुड़े कई विकास कार्य स्थानीय ठेकेदारों ने अपने साधन-संसाधनों से पूर्ण कर सरकार को सौंपे हैं, परंतु उन पंजीकृत ठेकेदारों का भुगतान आज तक लंबित है। भुगतान में देरी के कारण ठेकेदारों की आर्थिक हालत कमजोर हुई है तथा छोटे व्यवसाय और परिवार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि लंबित बिलों और भुगतान को तत्काल निपटारा किया जाए ताकि ठेकेदारों को वित्तीय राहत मिल सके।
प्रेसवार्ता में पीएमजीएसवाई कांट्रेक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश चंद्र गहतोड़ी ने कहा कि प्रीक्वायरमेंट (पूर्व-अनिवार्य शर्तों) में उत्पन्न विसंगतियों ने ठेकेदारों के लिए काम करना और भी मुश्किल कर दिया है। कई बार ठेकेदारों से उनके काम का विवरण चार्टर्ड अकाउंटेंट से सत्यापित कराने को कहा जा रहा है, जो प्रक्रियात्मक बाधाओं और अतिरिक्त खर्चों को जन्म देता है। गहतोड़ी ने बताया कि इस वजह से ठेकेदारों को परियोजनाओं के क्रियान्वयन तथा भुगतान दोनों में देरी का सामना करना पड़ता है।
गहतोड़ी ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों और ग्लोबल क्राइसिस के कारण बिटूमेन (तारकोल) की दरों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। उन्होंने मांग की कि इस अतिरिक्त लागत को राज्य सरकार उठाए, क्योंकि अन्य विभागों में यह बढ़ी हुई लागत वहन की जा रही है, मगर पीएमजीएसवाई परियोजनाओं में स्पष्ट भेदभाव बरता जा रहा है। इस भेदभाव के चलते ठेकेदारों पर अतिरिक्त दबाव आ रहा है और परियोजनाओं की लागत प्रभावशीलता प्रभावित हो रही है।
समिति ने प्रमुख मांगों में शामिल किया:
लंबित भुगतान निस्तारण: आपदा से संबंधित कार्यों तथा सलाना रखरखाव के भुगतान 2021-22 से लंबित हैं, इन्हें तत्काल मुक्त किया जाए।
ऑफलाइन सिक्योरिटी डिपॉज़िट का भुगतान शीघ्र किया जाए।
प्रीक्वायरमेंट में आई विसंगतियों को सुलझाया जाए तथा पद्धतिगत अड़चनों को हटाया जाए।
बिटूमेन की बढ़ी हुई कीमतों को सरकार द्वारा मान्यता दे कर भुगतान संरचना में समायोजन किया जाए ताकि ठेकेदारों को आर्थिक भार न उठाना पड़े।
प्रदेशीय ठेकेदारों के रोजगार की रक्षा हेतु बाहरी ठेकेदारों के आ रहे दबाव का समाधान निकाला जाए।
प्रेसवार्ता में उपस्थित कई ठेकेदारों ने निजी तौर पर भी कहा कि भुगतान और अनुबंध संबंधी नियमों में पारदर्शिता की कमी, अनावश्यक बोली प्रक्रियाएँ और स्थानीय मजदूरों की रोजगार गारंटी न होने से ठेकेदारों की समस्याएँ बढ़ रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आगे आर्थिक तथा सामाजिक स्तर पर संगठित हस्तक्षेप
जैसे धरने, प्रदर्शन की रणनीति अपनाने पर विचार किया जाएगा।
ठेकेदारों का कहना है कि न केवल उनकी रोज़गार क्षमता घट रही है, बल्कि कई ठेकेदार अपने कर्ज़ के तले दबने लगे हैं क्योंकि समय पर भुगतान न मिलने से बैंक ऋण और दावों का दबाव बढ़ गया है। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की कि मामले की त्वरित जाँच कर भुगतान रिलीफ और नीति में आवश्यक सुधार करके स्थानीय ठेकेदारों को बचाया जाए।
सरकार या संबंधित विभाग की ओर से अभी तक इस प्रेसवार्ता पर कोई आधिकारिक टिप्पणी प्राप्त नहीं हुई है। समिति ने अपनी चिंताओं और माँगों की कॉपी संबंधित विभागों तथा विधायकों को भी भेजने की बात कही है और कहा है कि अपेक्षित कार्रवाई न होने पर वे अगला कदम उठाएँगे।
इस प्रेसवार्ता में संजय पोखरियाल अध्यक्ष ठेकेदार संयुक्त जन मंच समिति, रमेश चंद्र गहतोड़ी अध्यक्ष पीएमजीएसवाई कांट्रेक्टर एसोसिएशन, तारा चंद महासचिव, हर्षवर्धन शर्मा मनोज कुमार व अमित जैन इत्यादि मौजूद रहे,

