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चंद्र कुँवर बर्त्वाल जयंती पर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नागनाथ पोखरी में संगोष्ठी का हुआ आयोजन। NIU

चंद्र कुँवर बर्त्वाल जयंती पर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नागनाथ पोखरी में संगोष्ठी का हुआ आयोजन। NIU

NIU ✍️राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नागनाथ पोखरी में ‘हिन्दी विभाग’ के तत्वावधान में प्रकृति के चितेरे एवं हिमवंत कवि चंद्र कुँवर बर्त्वाल की जयंती के अवसर पर एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए महान कवि के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. अभय कुमार श्रीवास्तव ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि चंद्र कुँवर बर्त्वाल केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि हिन्दी साहित्य के ऐसे विलक्षण कवि थे, जिन्होंने हिमालय, प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं को अपनी रचनाओं में सजीव अभिव्यक्ति दी। उन्होंने कहा कि साहित्य और विज्ञान एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। साहित्य मनुष्य की संवेदनाओं और कल्पनाशक्ति का विकास करता है, जबकि विज्ञान तर्क, ज्ञान और तकनीकी प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है। दोनों के समन्वय से ही समाज और राष्ट्र का संतुलित विकास संभव है।

कार्यक्रम का संचालन हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. कीर्ति गिल ने किया। उन्होंने चंद्र कुँवर बर्त्वाल के संघर्षपूर्ण एवं अत्यंत मार्मिक जीवन की घटनाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए उनके साहित्यिक अवदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अल्पायु में ही बर्त्वाल जी ने हिन्दी कविता को ऐसी अमूल्य धरोहर प्रदान की, जो आज भी साहित्य प्रेमियों और शोधार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है।

इस अवसर पर हिन्दी विभाग की डॉ. शशि चौहान ने अपने वक्तव्य में कहा कि चंद्र कुँवर बर्त्वाल की कविताओं में प्रकृति केवल सौंदर्य का विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन की संवेदनाओं, सांस्कृतिक चेतना और लोकजीवन का सजीव चित्रण है। उन्होंने विद्यार्थियों से उनके साहित्य का अध्ययन कर पर्यावरण संरक्षण एवं मानवीय मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।

डॉ. प्रियंका घिड़ियाल ने कहा कि चंद्र कुँवर बर्त्वाल का साहित्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य निधि है। उनकी रचनाओं में हिमालय, प्रकृति, लोकजीवन और मानवीय करुणा का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी तक बर्त्वाल जी के साहित्य को पहुँचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

शिक्षाशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. रेखा चमोली ने अपने संबोधन में प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस महाविद्यालय का नाम उत्तराखंड के महान साहित्यकार एवं हिमवंत कवि चंद्र कुँवर बर्त्वाल के नाम पर होना हम सभी के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि किसी शिक्षण संस्थान का नाम किसी महान साहित्यकार के नाम पर होना विद्यार्थियों को साहित्य, संस्कृति, संवेदनशीलता और सृजनशीलता के प्रति निरंतर प्रेरित करता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि महाविद्यालय भविष्य में भी ऐसे साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से बर्त्वाल जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य करता रहेगा।

भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. योगेश प्रसाद भट्ट ने कहा कि बर्त्वाल जी की रचनाएँ प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों का संदेश देती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से उनके साहित्य से प्रेरणा लेकर प्रकृति संरक्षण एवं सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। इस अवसर पर उन्होंने बर्त्वाल जी की प्रसिद्ध रचना ‘मेघकृपा’ की कुछ पंक्तियों का भावपूर्ण पाठ भी किया।

इस अवसर पर महाविद्यालय की छात्राओं पार्वती, अनुशिखा एवं काजोल ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा चंद्र कुँवर बर्त्वाल की रचनाओं का प्रभावपूर्ण पाठ प्रस्तुत किया। वहीं महाविद्यालय के छात्र गौरव ने चंद्र कुँवर बर्त्वाल का सुंदर चित्र बनाकर अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से कवि के प्रति श्रद्धा एवं सम्मान प्रकट किया।

संगोष्ठी के अंत में उपस्थित सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने हिमवंत कवि चंद्र कुँवर बर्त्वाल को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके साहित्यिक अवदान का स्मरण किया तथा उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. योगेश भट्ट, डॉ. शाजिया सिद्दीकी, डॉ. रामानंद उनियाल, डॉ. किरण चौहान, डॉ. श्वेता रावत, डॉ. आरती रावत, डॉ. अनुपम रावत, डॉ. आयुष बर्त्वाल, डॉ. प्रवीण मैठाणी, डॉ. सोहनी सती, डॉ. भगवती पंत, डॉ. केवला नन्द, श्री दिनेश नेगी, श्री दिगम्बर सिंह, श्री विमल विष्ट, श्री शिवा कुंवर, श्री विक्रम कंडारी, श्री चंदन सिंह, श्री चंद्रेश भट्ट, श्रीमती ललिता भंडारी, श्री सतीश चमोला, श्री नवनीत, श्री विजयपाल, श्री विजय कुमार, श्री गुलशन, श्री प्रबल, श्री अनिल कुमार एवं श्री दीपक सिंह सहित समस्त प्राध्यापकगण, शिक्षणेत्तर कर्मचारी तथा छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

प्राचार्य

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