दीप मैठाणी NIU✍️देहरादून,
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में वकीलों और जिलाधिकारी (डीएम) सवीन बंसल के बीच भड़का विवाद अब गरमाता जा रहा है। पूर्व डीएम के कार्यकाल से चले आ रहे कूपन घोटाले और चैंबर आवंटन घोटाले जैसे मामलों के बाद अब वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमचंद शर्मा पर बार लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश ने पूरे कानूनी हलकों में हंगामा मचा दिया है। सूत्रों का दावा है कि यह विवाद बार एसोसिएशन में व्याप्त अव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार से ध्यान भटकाने की चाल हो सकती है। क्या यह महज एक छोटा-मोटा टकराव है या पर्दे के पीछे बड़ा खेल चल रहा है? सवालों का दौर तेज हो गया है, चर्चाएं जोरों पर है कि क्या वर्तमान बार अध्यक्ष ने अपनी जान बचाने हेतु ही तो इस प्रकरण को हवा नहीं दी? क्योंकि एसआईटी भूमि की जांच रिपोर्ट साफ कहती है की अनिल शर्मा उर्फ चीनी दाखिला खारिज गलत तरीके से निरस्त कराने के दोषी हैं, वहीं जिलाधिकारी देहरादून सही तरीके से जांच करें तो वर्त्तमान बार अध्यक्ष को जेल तक हो सकती है, संशय है कि इसीलिए इस प्रकरण को उपजाया गया है ताकि जिलाधिकारी देहरादून को ठिकाने लगाया जा सके।।
विवाद की शुरुआत: कोर्ट में आपत्तिजनक व्यवहार का आरोप…
बीते दिनों एक मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमचंद शर्मा के व्यवहार को डीएम सवीन बंसल ने ‘आपत्तिजनक और अदालती अवमानना’ करार दिया। इसके जवाब में डीएम ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर शर्मा का बार लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश कर दी। यह कदम इतना कड़ा था कि देहरादून बार एसोसिएशन से जुड़े सैकड़ों वकीलों ने इसे ‘पूरी वकील बिरादरी का अपमान’ बताते हुए आंदोलन का ऐलान कर दिया।
बार अध्यक्ष अनिल शर्मा उर्फ कुकरेती ने कहा, “प्रेमचंद शर्मा ने हमेशा अधिवक्ताओं की समस्याओं को प्रशासन के सामने ठोस तरीके से उठाया है। उन्हें टारगेट किया जा रहा है।” वे भावुक नजर आए और बोले, “यह कार्रवाई वकील बिरादरी पर हमला है।” वकीलों ने फैसला लिया कि डीएम का तबादला न होने तक कोर्ट का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। सोमवार को राजस्व न्यायालयों और रजिस्ट्रार कार्यालयों में भी काम ठप रहा, जिससे आम लोगों की रजिस्ट्री और अन्य कार्य लंबित हो गए। मंगलवार को आगे की रणनीति तय की जाएगी।
बार एसोसिएशन में भ्रष्टाचार के पुराने घाव…
सूत्र बताते हैं कि यह विवाद बार एसोसिएशन की आंतरिक अव्यवस्थाओं को छिपाने की कोशिश है। पिछले वर्षों में कूपन घोटाला और चैंबर आवंटन घोटाला चरम पर रहा। हाल ही में SIT की भूमि रिपोर्ट में वर्तमान बार अध्यक्ष का नाम आने से शक की सुईें तेज हो गई हैं। क्या डीएम और शर्मा का टकराव इन मुद्दों से ध्यान हटाने का हथकंडा है? वकील समुदाय और आम जनमानस में यही चर्चा जोरों पर है।
प्रशासन पर गंभीर आरोप: दस्तावेज छेड़छाड़ और अनियमितताएं…
वकीलों का आरोप है कि डीएम के अधीन रिकॉर्ड रूम में दस्तावेजों से छेड़छाड़ के खुलासे हो चुके हैं। सवालखानी प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं हैं, जबकि तहसील स्तर पर दाखिल-खारिज और विरासत की फाइलें महीनों से धूल खा रही हैं, खुद वर्तमान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा उर्फ चीनी का नाम धोखे से दाखिला खारिज बदलवाने मे उजागर हो चुका है। इन लापरवाहियों के बावजूद सोशल मीडिया पर डीएम सवीन बंसल के समर्थन में पोस्ट्स उमड़ पड़ी हैं, जहां उन्हें ‘ईमानदार और जिम्मेदार अधिकारी’ कहा जा रहा है। प्रशासन ने अभी तक इन आरोपों पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है।
आम जनता पर असर: न्याय की राह में बाधा…
इस आंदोलन से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं आम नागरिक। रजिस्ट्री, म्यूटेशन और अन्य राजस्व कार्य ठप होने से सैकड़ों लोग परेशान हैं। वकील नेता कहते हैं, “हमारा संघर्ष न्याय के लिए है, लेकिन इसका खामियाजा जनता भुगत रही है।” वहीं, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि डीएम का कदम कानूनी गरिमा बनाए रखने के लिए जरूरी था। वहीं शंशय यह भी है कि जिला अधिकारी के किसी बड़े एक्शन को रोकने के लिए यह सारा प्रपंच किया जा रहा हो।। SIT रिपोर्ट संकलित… 👇👇
आगे क्या? मंगलवार को बड़ा फैसला…
बार एसोसिएशन मंगलवार को आपात बैठक बुला रही है, जहां आंदोलन को तेज करने या बातचीत का रास्ता चुनने पर विचार होगा। डीएम सवीन बंसल ने वकीलों से शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे। यह विवाद न केवल देहरादून के कानूनी तंत्र को प्रभावित कर रहा है, बल्कि उत्तराखंड की प्रशासनिक विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर रहा है व जमीनों के फर्जी बारे में शासन प्रशासन व अधिवक्ताओं में से क्यों की संलिप्तता का प्रश्न खड़ा कर रही है,
क्या यह साधारण विवाद है या षड्यंत्र? समय ही बताएगा। NIU इस मामले की लगातार अपडेट्स लाता रहेगा।

