दीप मैठाणी, देहरादून NIU ✍️ उत्तरांचल प्रेस क्लब द्वारा आयोजित म्यूजिकल नाइट ने साबित कर दिया कि माइक सिर्फ खबरें पढ़ने के लिए नहीं है बल्कि यह खुद अपनी एक रंगीन दुनिया बुनता है। शाम भर क्लब के मंच पर ऐसे कई चेहरे उभरे जो आम दिनचर्या में सिर्फ खबरों के पीछे भागते दिखाई देतें हैं, लेकिन जब रोशनी उनकी तरफ़ घूमी तो शायर, गीतकार और नर्तक की शक्ल में सामने आए।
कार्यक्रम की शुरुआत क्लबहाउस के अध्यक्ष अजय राणा व सादर आमंत्रित अतिथियों के स्वागत-सत्र से हुई, जिसके बाद कार्यक्रम अचानक ही संगीत और कला के जाम से भर गया।
शायरी की पंक्तियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया, कुछ शायरों ने पत्रकारिता और समाज पर तीखी टिप्पणियों के साथ अपने जज़्बात बाँटे, तो कुछ ने प्रेम और यादों के हल्के-फुल्के रंग बिखेर दिए।
गीतों की पंक्तियाँ स्थानीय संवेदनाओं और व्यक्तिगत कहानियों से भरी थीं, क्लब के कई सदस्यों ने स्वयं लिखे गीतों की प्रस्तुति दी, जिनमें से कुछ ने पारंपरिक लोकसंगीत की झलक दी तो कुछ ने समकालीन शैली में ताल बिखेरा।
सबसे चौंकाने वाली बात थी जब कुछ साथी पत्रकारों ने नृत्य के रूप में अपनी कला का प्रदर्शन किया…
कई पत्रकार साथियों ने कहा कि वे आज एक नए रूप में अपने सहकर्मियों को देखने आए और घर जाते समय यह एहसास लेकर गए कि हर समाचार का पीछा करने वाला व्यक्ति भी किसी रचना के पीछे कमरे में बैठा कलाकार हो सकता है। क्लब ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में ऐसे कार्यक्रम नियमित अंतराल पर आयोजित किए जाएंगे ताकि स्थानीय पत्रकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के पर्याप्त अवसर मिल सकें।

