दीप मैठाणी ✍️NIU देहरादून, राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त और भारत के राष्ट्रपति से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता व संख्य योग फाउंडेशन के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ. मुकुल शर्मा ने हाल ही में वसुदेव कुटुंब व युवा संवाद द्वारा आयोजित चार दिवसीय शिविर में प्रतिभागी युवाओं को लक्ष्य के प्रति जागरूक करते हुए जीवन में सफलता के व्यावहारिक सूत्र बताए। शिविर का उद्देश्य युवाओं को आत्म-प्रबंधन, समय प्रबंधन और मनोवैज्ञानिक मजबूती के साधन उपलब्ध कराना था।
शिविर के दौरान डॉ. शर्मा ने भाग लेने वाले युवाओं को सेल्फ मैनेजमेंट, टाइम मैनेजमेंट, स्ट्रेस मैनेजमेंट, बिलीफ सिस्टम (आस्थाओं का प्रबंधन), गोल सेटिंग, नॉलेज मैनेजमेंट और एक्शन मैनेजमेंट जैसे विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। उन्होंने रौशन उदाहरणों और दिनचर्या पर आधारित टिप्स साझा करते हुए बताया कि किसी भी नकारात्मक या चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में घबराने की आवश्यकता नहीं है। उनका संदेश था “जब तक सांस चल रही है, आप कुछ भी कर सकते हैं।” डॉ. शर्मा ने कहा कि व्यक्ति अपनी इच्छाशक्ति और सतत प्रयास से न केवल अपने जीवन में बल्कि राज्य, राष्ट्र और विश्व स्तर पर भी सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम है।
- डॉ. शर्मा ने अपने संबोधन में कुछ व्यावहारिक तरीक़े और नियम साझा किए जिन पर चलकर युवा अपनी उत्पादकता और मानसिक शक्ति बढ़ा सकते हैं।
- स्वयं की पहचान और आत्म-प्रबंधन: अपनी ताकत और कमजोरियों की सूची बनाएं और रोज़ाना छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें पूरा करने की आदत डालें।
- समय प्रबंधन: प्राथमिकताओं के अनुसार कार्यों को वर्गीकृत करें और “सर्वाधिक प्रभावी” कार्यों को पहले पूरा करें।
- तनाव प्रबंधन: श्वास-प्रश्वास पर ध्यान देने, छोटे ब्रेक लेने और सकारात्मक सोच बनाए रखने की तकनीकें अपनाएँ।
- विश्वास प्रणाली का निर्माण: नकारात्मक मान्यताओं को चुनें, चुनौती दें और उन्हें सकारात्मक मान्यताओं से बदलें।
- लक्ष्य निर्धारण और कार्रवाई: स्पष्ट, मापन योग्य, प्राप्त करने योग्य, वास्तविक और समयबद्ध (SMART) लक्ष्य बनाएं और छोटे-छोटे कदमों में उन्हें लागू करें।
- ज्ञान प्रबंधन: सीखने की निरन्तरता रखें और उपलब्ध संसाधनों का व्यवस्थित उपयोग करना सीखें।
- कार्रवाई प्रबंधन: योजनाओं को व्यवहार में लाने के लिए दैनिक कार्यसूचियाँ और मूल्यांकन प्रणाली अपनाएँ।
डॉ. शर्मा ने कहा कि जीवन में चुनौतियाँ आयेगीं परंतु घबराना समाधान नहीं है। उन्होंने प्रतिभागियों को उदाहरण देकर समझाया कि किस प्रकार सकारात्मक दृष्टिकोण और अनुशासन से किसी भी समस्या का सामना किया जा सकता है। उनका मानना है कि अगर कोई व्यक्ति स्वयं पर नियंत्रण और निरन्तर प्रयास रखे तो वह न केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त कर सकता है बल्कि समाज में प्रेरणा की लहर भी फैला सकता है।
शिविर के चार दिनों के सुचारु संचालन में संस्था की सचिव श्रीमती कोमल जी, अनिल जी, साक्षी नंदा जी और थापा मैडम का विशेष योगदान रहा। आयोजकों ने प्रशिक्षण सत्रों के समन्वय, वक्ताओं का प्रबंधन और प्रतिभागियों की सुविधाओं का ध्यान रखते हुए शिविर को व्यवस्थित और फलदायी बनाया। आयोजकों ने कहा कि इस तरह के शिविरों का उद्देश्य युवाओं को न केवल प्रेरित करना है बल्कि उन्हें व्यावहारिक उपकरण भी देना है ताकि वे सामाजिक बदलाव में सक्रिय भागीदार बन सकें।
शिविर में शामिल कई युवाओं ने कार्यशालाओं और डॉ. शर्मा के सत्रों के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी। अक्सर सुनने को मिला कि वे अब अपने समय और लक्ष्यों को लेकर अधिक स्पष्टता और आत्मविश्वास महसूस कर रहे हैं। कुछ युवाओं ने कहा कि वे तनाव से निपटने के उपाय सीखकर अपने शैक्षिक और व्यावसायिक लक्ष्य बेहतर तरीके से हासिल कर पाएँगे।
संख्य योग फाउंडेशन व वसुदेव कुटुंब ने भविष्य में ऐसे और भी कार्यक्रमों की रूपरेखा रेखांकित करने की बात कही है ताकि अधिक से अधिक युवा इन कौशलों तक पहुँच पाएं। आयोजकों का लक्ष्य है कि स्थानीय स्तर पर शुरू हुई यह पहल आगे चलकर व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले और युवा शक्ति को राष्ट्रनिर्माण में प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सके।

