देहरादून NIU ✍️देहरादून में एक 17 साल की एनडीए परीक्षा की छात्रा के हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरने और गंभीर रूप से घायल हो जाने का मामला प्रकाश में आया है, मामला जुड़ा है देहरादून के विवादित और चर्चित शिक्षण संस्थान “दून डिफेंन्स ड्रीमर्स/ड्रीमर्स एडू हब लिमेटेड” Doon Defence Dreamers से, इस गंभीर घटना का उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पीड़िता के पिता की शिकायत पर स्वतः संज्ञान लिया है और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून को तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने मामले को बेहद गंभीर करार देते हुए सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा और अन्य सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को संरक्षित रखने तथा निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने हेतू निर्देशित किया है।
आयोग को प्राप्त शिकायत के अनुसार घटना से जुड़ी शिकायत 11 जून 2026 को छात्रा के पिता जोकि ग्वालियर निवासी हैं द्वारा दर्ज कराई गई है । उन्होंने बताया है कि उनकी 17 वर्षीय पुत्री अप्रैल 2026 से देहरादून के “दून डिफेंन्स ड्रीमर्स/ड्रीमर्स एडू हब लिमेटेड” में एनडीए की तैयारी कर रही थी और सहस्रधारा रोड स्थित स्काई लाइन अपार्टमेंट के हॉस्टल में ठहरी हुई थी।
शिकायत में आरोप है कि 4 अप्रैल 2026 की रात छात्रा हॉस्टल की तीसरी मंजिल से नीचे गिर गई। गंभीर रूप से घायल छात्रा को राजधानी के एक अस्पताल के न्यूरो आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत नाजुक बताई गई है। पत्र में कहा गया है कि सिर और शरीर के अन्य नाजुक हिस्सों पर गंभीर चोटें आई हैं और वह फिलहाल जीवन-मृत्यु की जंग लड़ रही है।
पिता का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने 4 जून 2026 को आईटी पार्क चौकी प्रभारी और राजपुर थाना में लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन शिकायत दायर करने के एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई और ना ही घटनास्थल को विधिवत रूप से सुरक्षित रखा गया। इसके चलते, उनका कहना है, महत्वपूर्ण साक्ष्यों में छेड़छाड़ की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि घटना के समय मौजूद अन्य छात्राओं के बयानों पर संदेह है और पूरे कृत्य को “नाइट आउट” बताकर हल्का दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। पिता ने आरोप लगाया है कि दुर्घटना के बाद उनकी पुत्री के मोबाइल फोन के साथ भी छेड़छाड़ हुई, जिससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
पीड़िता के पिता ने आयोग के समक्ष यह भी मांग रखी है कि यह कोई साधारण हादसा नहीं, बल्कि योजनाबद्ध साजिश का परिणाम हो सकता है। उन्होंने हत्या के प्रयास का आशंका जताते हुए आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज और विस्तृत विवेचना की मांग की है। शिकायत में संस्थान के एक संचालक के साथ मोबाइल साझा किए जाने और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
अब उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पुलिस को जरूरी कदम उठाने और सभी प्रासंगिक साक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रकरण की जांच के निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई से जुड़े विवरण आने पर अपडेट उपलब्ध कराए जाएंगे।

