हांगझोऊ एशियाई खेल 2023 में दो रजत, एक कांस्य – जापान में एक स्वर्ण, एक रजत, एक कांस्य
तमिलनाडु के कोयंबटूर की रहने वाली एथलीट विद्या रामराज की कहानी संघर्ष से शिखर तक की है। पिता ट्रक ड्राइवर और माँ गृहिणी हैं। एक समय था जब पिता को उधार लेकर बेटी के लिए जूते खरीदने पड़े थे।
हेमंत रस्तोगी की रिपोर्ट के अनुसार:
विद्या ने 2002 से 2018 तक चला आ रहा भारतीय एथलेटिक्स का 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़कर भी खुशी को दबाकर रखा था। यह पीटी उषा का 42 साल पुराना रिकॉर्ड था, जिसे विद्या ने 400 मीटर बाधा दौड़ में 55.42 सेकंड नहीं बल्कि 55.68 और फिर 54.75 सेकंड के समय के साथ तोड़ा।
2023 एशियाड में विद्या ने रिले में स्वर्ण जिताया। एथलेटिक बहन नित्या के लिए एथलेटिक जूतों की व्यवस्था नहीं कर पाए थे। कई लोगों के पास गए, लेकिन उन्हें मदद नहीं मिली। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और उधार लेकर जूतों की व्यवस्था कर दोनों बहनों के करियर को आगे बढ़ाया।
विद्या ने जापान में जीते अपने पदकों को अपनी बहन नित्या को समर्पित किया और अपने वेतन से उनका खर्च उठाया। विद्या ने कहा, खुशी है कि उन्होंने पीटी उषा के रिकॉर्ड को तोड़ा, पर उन्हें ज्यादा खुशी है कि वह 55 सेकंड से कम समय में 400 मीटर बाधा दौड़ में 54.75 सेकंड का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाना चाहती हैं। उनकी इच्छा है कि वह इस दौड़ को 54 सेकंड से कम में पूरा करके 54 सेकंड से कम में दौड़ने वाली पहली भारतीय बेटी बनें। आने वाली पीढ़ी को नई चुनौती दें।
संघर्ष से सफलता तक – गर्व है भारत को विद्या पर!

