मसूरी। मसूरी स्थित सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संजोने वाले सोहम हिमालय सेंटर किसी पहचान का मोहताज नहीं है इसके संस्थापक सदस्य समीर शुक्ला और उनकी धर्मपत्नी डॉक्टर कविता शुक्ला द्वारा लगातार उत्तराखंड की संस्कृति को दर्शाते हुए विभिन्न प्रकार के वस्तुओं को तैयार किया जा रहा है। समीर शुक्ला ने बताया कि प्रयागराज में महाकुंभ के समापन के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और उनके द्वारा तैयार किया गया धर्माचरण प्रतीक चिन्ह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेट किया गया है। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण चिन्ह सनातन धर्म को बहुत बेहतर तरीके से परिभाषित करता है। धर्मांतरण चिन्ह में पीपल वृक्ष का सनातन ग्रंथों मे विशद वर्णन है इसलिए पूजनीय है ’पीपल पत्र’ को सनातन चिन्ह के रूप चुना गया है! पौराणिक और वैज्ञानिक रहस्य धारण किये पवित्र ’पीपल पत्र’ जो त्रिदेव वास, समत्व और आत्मज्ञान का द्योतक है प्रतीक चिंन्ह के मध्य मे ’धनुष- बाण’ अंकित है जो आदर्श व्यवस्था / रामराज्य का प्रतीक है। उन्होने कहा कि महाकुंभ सनातन धर्म का और दुनिया का सबसे बड़ा समागम है जिसको उनके द्वारा धर्माचरण प्रतीक चिंन्इ के माध्यम से समर्पित किया गया है। उन्होने कहा कि उनके और उनकी पत्नी डा. कविता षुक्ला द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट कर सर्वप्रथम उन्हें महाकुंभ के कुशल आयोजन के बधाई दी और उन्हें धर्माचरण प्रतीक भेंट कर इस सनातन गौरव शुभ चिह्न का विधिवत शुभारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने इस पूरी पहल को काफी सराय है उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की तर्ज पर बनाई गई ब्रह्म कमल पहाड़ी टोपी को देखते हुए उनके उत्तरप्रदेष के लिये त्रिवेणी टोपी का बनाया गया है जिसमें एक पटटी के माध्यम से देष की तीन प्रमुख तीन नदियों का मिलन दिखाया गया है गंगा जमुना सरस्वती एक वाहिनी रूप में प्रयागराज की परिकल्पना पर आधारित है और दूसरी तरफ यही धर्माचरण प्रतिक चिंन्ह लगाया है उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश बहुत सारी विविधताओं को अपने अंदर रखे हुए हैं और इतनी सारी विविधताओं को एक ही सूत्र में बाधने के लिए त्रिवेणी टोपी का निर्माण किया गया। उन्होंने कहा कि उनको पूरी उम्मीद है कि जिस तरीके से ब्रह्म कमल पहाड़ी टोपी पूरे उत्तराखंड के साथ देश में अपनी पहचान हासिल की है उसी तरीके से त्रिवेणी टोपी को भी लोग पसंद करेंगे।
उन्होंने बताया कि 2017 में उन्होंने उत्तराखंड में पहाड़ी ब्रह्म कमल पहाड़ी टोपी को बनाया था जिसको देश के पहले सीडीएस बिपिन रावत से लेकर अजीत डोभाल और कई बड़े नेताओं द्वारा इसको पहना गया और जब 26 जनवरी 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रह्म कमल पहाड़ी टोपी पहनी तो पूरे देश में इसकी चर्चा हुई और आज इसे एक अपना अलग स्थान प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि आज पूरे देश में छोटे से लेकर बड़ा व्यक्ति उत्तराखंड की ब्रह्म कमल पहाड़ी टोपी का इस्तेमाल कर रहा है कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी इसको अलग पहचान मिल रही है और जब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड आते हैं तो ब्रह्म कमल पहाड़ी टोपी जरूर पहनते हैं जिसको देख वह गौरवावित महसूस करते है। और आज उत्तराखंड में ब्रह्म कमल पहाड़ी टोपी उत्तराखंड की पहचान बन चुकी है और उसी से प्रेरित होकर उन्होंने पहाड़ी गमछा बनाया जो उत्तराखंड के वादक और वाद्य यंत्र दर्षाया गया है जिसका मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा लोकार्पण किया गया और हाल में ही उनके द्वारा देवदार अंग वस्त्र बनाया गया था जिसको नेशनल गेम्स के उद्घाटन के प्रदेष के मुख्यमंत्री पुश्कर सिंह धामी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट कर शुभारंभ किया गया। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि वह उत्तराखंड के छोटी-छोटी चीजों हो जो प्रदेष का मूल है तो यहां की आत्मा है उनको कला के रूप में आकर दिया जा सके।

