रिपोर्ट: सुनील सोनकर✍️
पहाड़ों की रानी मसूरी में सर जॉर्ज एवरेस्ट का जन्मदिवस पर सर जॉर्ज एवरेस्ट हाउस पर मशहूर इतिहासकार गोपाल भारद्वाज व उनके कुछ साथियों ने मनाया जबकि पर्यटन विभाग उनके जन्मदिवस को पूरी तरीके से भूल गया ।बता दें कि पर्यटन विभाग द्वारा करीब 23 करोड़ की लागत से सर जॉर्ज एवरेस्ट हाउस और आसपास क्षेत्र का सौदर्यकरण व पुनर्निर्माण किया जा रहा है परंतु र्प्यटन विभाग और प्रदेश सरकार सर जॉर्ज एवरेस्ट के जन्मदिवस को भूल गई है जिसको लेकर मशहूर इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने नाराजगी व्यक्त की है। इस मौके पर जरर्ज एवरेस्ट हाउस के जिर्णोद्वार कार्य कर रही कम्पनी और गोपाल भारद्वाज द्वारा एवरेस्ट के आसपास वृषारोपण भी किया गया। उन्होंने बताया कि सर जॉर्ज एवरेस्ट वेल्स सर्वेक्षक थे. इसके साथ ही वह 1830 से 1843 तक भारत के सर्वेयर जनरल रहे. सर जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी का नाम पड़ा है। जॉर्ज एवरेस्ट वेल्स द्वारा 1832 से 1843 के बीच भारत की कई ऊंची चोटियों की खोज हुई और उन्हें मानचित्र पर उकेरा गया. मसूरी में ही ब्रिटिश काल के महान सर्वेयर सर जॉर्ज एवरेस्ट ने माउंट एवरेस्ट की खोज कर उसे मानचित्र में उकेरा था और आज भी उसकी यादें मसूरी में ताजा हैं. वहीं भारत के प्रथम सर्वेयर जनरल सर जॉर्ज एवरेस्ट की 231 वीं जयंती है.। ंरॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी ने 1848 में उनका यह सम्मान उनके सर्वे में योगदान के लिए दिया था. यह सर्वेक्षण 1806 में विलियम लैंबटन द्वारा शुरू किया और यह कई दशकों तक चलता गया.उन्होने बताया कि जॉर्ज एवरेस्ट ने मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट हाउस में रहकर आसपास के क्षेत्र का सर्वेक्षण किया गया था. जिनके जन्मदिन को पिछले कई सालों से उत्तराखंड पर्यटन विभाग धूमधाम से मनाता आया है. लेकिन, इस बार जॉर्ज एवरेस्ट हाउस के जीर्णोद्धार के बाद भी उनका जन्मदिन नहीं मनाया जा रहा है.ं
एवरेस्ट की खोज करने वाले सर जॉर्ज एवरेस्ट का घर और प्रयोगशाला मसूरी में पार्क रोड पर स्थित है जो गांधी चौक से लगभग 6 किमी दूर है. सर जॉर्ज का घर और प्रयोगशाला 1832 में बनाया गया था. उनका आशियाना ऐसी जगह पर बना है जहां से दून घाटी, अलगाड़ नदी और हिमालय का नैसर्गिक सौन्दर्य दिखाई देता है. बता दें कि सर जॉर्ज एवरेस्ट के पास ग्रेट ट्रिगोनोमेट्रिकल सर्वे के सुपरिटेंडेंट का भी दायित्व था, जिसे उन्होंने जिस एक्यूरेसी के साथ अंजाम दिया, आज भी उसकी मिसाल दी जाती है. वहीं सर जॉर्ज एवरेस्ट का यह घर अब आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की देखरेख में हैं।
बता दे कि हाल में की मसूरी के ऐतिहासिक सर जॉर्ज एवरेस्ट हाउस का कायाकल्प किया जा रहा है. राज्य सरकार को सर जॉर्ज एवरेस्ट हाउस को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित कर रही है.। मसूरी में हाथीपांव पार्क रोड क्षेत्र में 172 एकड़ में बने सर जॉर्ज एवरेस्ट हाउस (आवासीय परिसर) और इससे लगभग 50 मीटर दूरी पर स्थित प्रयोगशाला (ऑब्जर्वेटरी) का जीर्णाेद्धार का कार्य पूरा हो गया है.। उत्तराखंड पर्यटन संरचना विकास निवेश कार्यक्रम के तहत एशियन डेवलपमेंट बैंक द्वारा वित्त पोषित योजना द्वारा सर जॉर्ज एवरेस्ट हेरिटेज पार्क का जीर्णाेद्वार कराया जा रहा है. जिसकी लागत 23.70 करोड़ है. जीर्णोद्धार का काम अरुण कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा गया है. इसका लोकर्पण पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के द्वारा किया गया है परन्तु लोकार्पण के बाद भी जार्ज एवरेस्ट के आसपास के क्षेत्र को विकसित किया जा रहा है जॉर्ज एवरेस्ट हाउस को नये स्वरूप देने के के साथ कार्टाेग्राफिक म्यूजियम, आउट हाउस, बैचलर हाउस, ऑब्जर्वेटरी, स्टार गेजिंग हटस, स्टार गेजिंग डोमस, ओपन एयर थिएटर, पोर्टेबल टॉयलेट, पोर्टेबल फूड वैन, जॉर्ज एवरेस्ट पीक के लिये ट्रैक रूट रिन्यूवेशन भी बनाया जा रहा है।
अरुण कंस्ट्रक्शन कंपनी के इंजीनियर कुलदीप शर्मा ने बताया कि सर जॉर्ज एवरेस्ट हाउस का मूल स्वरूप को बरकरार रखते हुए एक बड़ा और छोटा म्यूजियम बनाया जा रहा है. जिसमें सर्च जॉर्ज से जुड़े इतिहास के साथ रिसर्च में इस्तेमाल हुए सामानों को भी प्रदर्शित किया जाएगा. उन्होंने बताया कि जॉर्ज एवरेस्ट हाउस के निर्माण के साथ पार्किंग व अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है. वहीं, मुख्य मार्ग से सर जॉर्ज एवरेस्ट हाउस को जाने वाली सड़क का भी पुनर्निर्माण किया जा चुका है.ऐतिहासिक सर जॉर्ज एवरेस्ट हाउस का मूल स्वरूप को बरकरार रखते हुए अंग्रेजों की तर्ज पर सीमेंट की जगह चक्की में पीस कर बनाए गए मिश्रण से जॉर्ज एवरेस्ट हाउस का पुनः निर्माण किया गया है. चक्की में चूना, सुर्खी, मेथी और उड़द की दाल को पानी के साथ पीसकर सीमेंट जैसा लेप बनाया जा रहा है, जिससे ईंटों को चिपकाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सर जॉर्ज एवरेस्ट हाउस के निर्माण के लिए विशेष लाहौरी ईंट से बनाया गया।
जिसके नाम पर दिए 23 करोड़ उसका ही जन्मदिन भूल गए सरकार और मसूरी विधायक गणेश जोशी ।

